मेरा पन्ना
Thursday, July 15, 2010
Sunday, July 4, 2010
अटलांटा का युवा हिन्दी शिविर संपन्न
डॉ. सुरेन्द्र गम्भीर
निदेशक युवा हिन्दी शिविर 2010
अटलांटा में हो रहे १०० युवा विद्यार्थियों का दस दिवसीय युवा हिन्दी शिविर का समापन समारोह शिक्षार्थियों की गतिविधियों के साथ बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। रविवार को एक भारतीय मेल लगा जिसमें विभिन्न विक्रेताओं ने अपनी अस्थायी दुकानें लगाईं और बच्चों ने वहां घूमकर चीज़ें खरीदीं। बेचने और ख़रीदने की प्रक्रिया हिन्दी में ही संपन्न हुई। जिस भाषा को सीखने का पिछले आठ दिनों से बड़े नियोजित ढंग से प्रयास चल रहा था उस भाषा को प्रयोग में लाने के लिए इस प्रकार का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इस अवसर पर माता-पिता भी शामिल हए और उन्होंने भी वहां खाने पीने की और दूसरी चीज़ों के विक्रेताओं से हिन्दी में ही बातचीत की। बीस शिक्षक भी अपने बाज़ू पर “मदद” की पट्टी लगाए इधर उधर घूम रहे थे। अगर बच्चों को हिन्दी में बोलने के लिए बात न सूझ रही हो तो वे इनके पास जाकर पूछ सकते थे कि फ़लाँ बात हिन्दी में कैसे कहेंगे। यह सवाल भी हिन्दी में ही पूछना होता था जिसकी तैयारी उनको पहले से कराई गई थी।
प्रवासी संदर्भ में वर्षों से भारत से दूर रह रहे भारतीय मूल के लोगों का स्थानीय भाषा में अभ्यस्त हो जाना स्वाभाविक ही है। यह बात सत्य है कि पहली पीढ़ी के लोग अपनी भाषा भूलते नहीं हैं परंतु दूसरी पीढ़ी के बच्चों के मस्तिष्क और व्यवहार पर नए देश की स्थानीय भाषा शुरू से ही हावी हो जाती है। इसलिए अपनी पैतृक भाषा को बनाए रखने के लिए उन्हें विशेष प्रयास करना पड़ता है।
मेले के बाद बच्चों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें नाटिकाएं, नृत्य, गीत और हिन्दी के टंग-ट्विस्टर्ज़ आदि प्रस्तुत किए गए। यह ठीक है कि इन प्रस्तुतियों के लिए तैयारी की गई थी परंतु इन प्रस्तुतियों के माध्यम से युवा शिक्षार्थियों का जो विश्वास बढ़ता है वह एक बात है और उनके मुंह में भाषा के थिरकने से भाषा बोलने की जो हिचक दूर होती है वह भाषा के अधिग्रहण की दृष्टि से बड़ा ही उपयोगी पक्ष है। उच्चारण को सुधारने में भी यह प्रक्रिया बड़ी उपयोगी सावित होती है। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में मंच संचालन भी विद्यार्थियों ने ही किया। अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस प्रकार का अवसर देने के लिए हर प्रस्तुति के लिए अलग अलग विद्यार्थियों ने मंच पर आकर यह काम अपनी टूटी फूटी हिन्दी में बड़े विश्वास और साहस के साथ करके दिखाया। कुछ विद्यार्थियों ने केवल दो ही पंक्तियां बोलीं और कुछ ने कुछ अधिक वाक्यों में अपनी बात कही। प्रमाण पत्रों के वितरण के वाद युवा विद्यार्थियों को कहा गया कि अगर कुछ विद्यार्थी मंच पर आकर बोलना चाहें तो आकर बोलें। इस आह्वान को स्वीकार करते हुए लगभग दस विद्यार्थी बड़े उत्साह के साथ मंच पर भागते हुए आए और उन्होंने बड़े उत्साह के साथ दो चार वाक्य हिन्दी में बोले। वाक्यों में कुछ थे – ‘बहुत मज़ा आया’, ‘आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुई’, ‘नमस्ते’, ‘धन्यवाद’, ‘आप कैसे हैं’ आदि। बच्चों के मुख से इस प्रकार स्वाभाविक हिन्दी निकलते देख प्रसन्न-वदन शिक्षक और शिक्षिकाएं देखते ही बनती थीं। माता-पिता तो शिक्षकों से भी ज़्यादा प्रसन्न थे। उनकी खुशी का ठिकाना न था। बाद में शिक्षकों ने अपनी कक्षा के छात्रों को एक एक करके गले लगाया और बड़े प्यार के साथ उनको विदा किया।
शिविर का वातावरण सांस्कृतिक गतिविधियों से भरपूर था और इन्हीं गतिविधियों में रमते रमते युवा छात्र हिन्दी के संदर्भ-सम्मत छोटे छोटे वाक्यों को सुनते, उनका उत्तर देते और उनका अभ्यास करते। उनका ध्यान भाषा पर न होकर उनके सामने उपस्थित कार्य पर होता। भाषा सीखने का यही उत्तम तरीका है। जब बच्चे घर के वातावरण में सीखते हैं तो वे भी ऐसे ही सीखते हैं। विदेशी भाषा के शिक्षण से संबंधित शोध-साहित्य में इसकी चर्चा कुछ इस प्रकार हुई है कि जब शिक्षार्थी का ध्यान शब्दों, वाक्यों और उनके व्याकरण पर नहीं होता परंतु उनके अर्थ पर होता है तब भाषा का ज्ञान अधिक स्थायी होता है। इसी पृष्ठभूमि में बच्चों ने कई प्रकार के पोस्टर बनाए, अपने अपने पासपोर्ट बनाए, तेल के दिये बनाए, टोपियां बनाईं और रगबिरंगे चित्र बनाए। ये सब कृतियां भारतीय प्रतिबिंबों से भरी थीं और उन पर उन्होंने हिन्दी के कुछ शब्द लिख कर उनकी विषयवस्तु को अभिव्यक्त किया। संस्कृति और भाषा के इस मिलन से भाषा की पैठ डनके मस्तिष्क में घर कर रही थी। दस दिन के इस कार्यक्रम में उन्होंने थोड़ी बहुत भाषा सीखी परंतु उससे ज़्यादा भाषा के प्रति उनकी सजगता और उनका आकर्षण और उसे आगे पढ़ने में उनकी रुचि निश्चित रूप से बढ़ी। माता पिता से जो प्रतिक्रियाएं हमें प्राप्त हुई हैं वे भी अत्यन्त उत्साहजनक थीं। कुछ का कहना था कि जब उनके बच्चे शाम को थके मांदे घर पहुंचते हैं तो हिन्दी के गीत गाते आते हैं और प्यार से मां को कहते हैं कि मां जल्दी करो बड़ी भूख लगी है। वे कहते हैं कि हम भारत से हैं इंडिया से नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे सुबह उठते ही शिविर जाने के लिए अपने आप तैयार होने लगते हैं। कभी उन्होंने यह नहीं कहा कि आज मैं बहुत थका हूं और आज मैं शिविर नहीं जाऊंगा। बच्चों का यह स्वीकारात्मक व्यवहार हम सबका सबसे बड़ा प्रमाणपत्र बना।
Tuesday, June 15, 2010
अमेरिका में युवा हिन्दी शिविर

२००७ में जब न्यूयार्क में विश्व हिन्दी सम्मेलन हुआ तो उसमें अनेक प्रवासी भारतीयों को एक बात खटकी कि उसमें प्रवासी भारतीयों की युवा पीढ़ी के लिए कुछ नहीं था। यदि इस सम्मेलन में हमारी युवा पीढ़ी के लिए भी कुछ कार्यक्रम होते तो प्रवासी संदर्भ में हमारी सांस्कृतिक भाषा और हमारे मूल्यों को कुछ प्रोत्साहन मिलता। इसी विचार ने २००९ में युवा हिन्दी संस्थान को जन्म दिया। इसी संस्थान के तत्वावधान में अमेरिका के अटलाँटा जार्जिया प्रदेश में जून १९ से २८ तक १० दिन का भाषा शिविर युवा पीढ़ी के १०० सदस्यों के लिए हो रहा है।
इस कार्यक्रम को जहां एक ओर अमरीकी सरकार की उदार आर्थिक सहायता प्राप्त है वहां दूसरी ओर अमरीका के प्रतिष्ठित कई विश्वविद्यलायों और शोध संस्थानों का समर्थन और सहयोग प्राप्त है। इस शिविर का दैनिक कार्यक्रम और गतिविधियों का समायोजन भाषा-विज्ञान के शोध-समर्थित नियमों के आधार पर होगा ताकि युवाओं को इस सांस्कृतिक अवगाहन से अधिकाधिक भाषा-लाभ हो और हिन्दी भाषा में प्रवीणता को बढ़ाने के लिए उनके भविष्य के द्वार खुलें। अमरीकी सरकार की भी यह हमसे अपेक्षा है । युवा हिन्दी संस्थान के कार्यकर्ता उसी दिशा में पिछले कई महीनों से इसी योजना को कार्यान्वित करने के लिए प्रयत्नशील हैं।
शिविर का कार्यक्रम प्रातः नौ बजे योगाभ्यास से शुरू होगा और उसके बाद हिन्दी शिक्षण की कक्षाएं, कंप्यूटर लैब, हस्तकला, अनेकानेक खेल (क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबलटैनिस, शतरंज, खो-खो, पिट्ठू आदि), नाटक, संगीत, नेचर वॉक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बॉलीवुड के गरमागरम गानों के साथ नाच का दैनिक कार्यक्रम है। दोपहर के खाने के समय भी हिन्दी के कुछ चलचित्र दिखाए जाएंगे जिसमें सब-टाइटल रहेंगे। शिविर की सब गतिविधियों में सब निर्दैश और सभी बातचीत हिन्दी के माध्यम से ही संपन्न होगी। शिविर में अंग्रेज़ी का प्रयोग वर्जित है। भाषा और संस्कृति में अवगाहन और भाषा सीखने का और उसे आत्मसात् करने का यही सहज तरीका है।
अमेरिका में हिन्दी की शिक्षा के लिए यह स्वर्णिम समय है। अमरीका सरकार ने हिन्दी को एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में स्वीकार किया है और फलस्वरूप सभी सरकारी स्कूलों में विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी को पढ़ाने के द्वार खोल दिए गए हैं। अमेरिकी सरकार का यह मानना है कि भविष्य में आर्थिक और राजनैतिक शक्ति के रूप में उभरते हुए भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय और राजनयिक संबंधों के संदर्भ में हिन्दी का महत्व बहुत अधिक है और यह दिन-ब-दिन बढ़ने वाला है। इसी सार्वभौमिक राजनैतिक विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए अमरीका की अगली पीढ़ी को दुनिया की महत्वपूर्ण भाषाओं और उनकी संस्कृतियों के ज्ञान से लैस करना बहुत आवश्यक समझा जा रहा है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस दीर्घकालीन योजना की व्यवस्था हुई है । भाषाओं की इस महत्वपूर्ण योजना को व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी लैंगवेज इनिश्येटिव के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।
भाषा हमारे चिंतन की वाहिका है और हर भाषा का हर मानव के कुछ विशिष्ट मूल्यों के साथ विशेष संयोग होता है। जहां एक ओर प्रवासी युवा पीढ़ी के सदस्य अमरीका को एक समर्थ देश बनाने में अपना योगदान देंगे वहां भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में वे अपने विभिन्न व्यवसायों के लिए भी अपने कैरियर का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हिन्दी भाषा ज्ञान के साथ हमारी युवा पीढ़ी के संबंध भारत के साथ भी संपुष्ट होंगे । उदीयमान भारत से लेकर अमरीका तक सभी के भविष्य के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा है। अमरीकी समाज में द्विभाषी लोगों की मांग बराबर बढ़ रही है और भविष्य में यह और ज़्यादा बढ़ने वाली है। चाहे वे डॉक्टर हों, वकालत के पेशे में हों, अन्तर्राष्ट्रीय व्यवसाय में हों, सरकारी महकमों में हों – सब जगह दूसरी भाषा पर उस भाषा से संबंधित समाजों के मूल्यों और अन्तर्निहित विचारधाराओं को समझने वाले और उन पर अधिकारपूर्वक बात करने वालों को वरीयता प्राप्त है। अमरीका के वर्तमान वयस्क कर्मचारियों को विदेशी भाषाओं की शिक्षा देने के लिए सरकार के कई अपने स्कूल भी हैं जिनमें विर्जीनिया में स्थित फ़ॉरन सर्विस इंस्टीट्यूट और मांट्रे कैलिफ़ोनिया में स्थित डिफ़ैंस लैंग्वेज इंस्टीट्यूट प्रमुख हैं।
इस कार्यक्रम को जहां एक ओर अमरीकी सरकार की उदार आर्थिक सहायता प्राप्त है वहां दूसरी ओर अमरीका के प्रतिष्ठित कई विश्वविद्यलायों और शोध संस्थानों का समर्थन और सहयोग प्राप्त है। इस शिविर का दैनिक कार्यक्रम और गतिविधियों का समायोजन भाषा-विज्ञान के शोध-समर्थित नियमों के आधार पर होगा ताकि युवाओं को इस सांस्कृतिक अवगाहन से अधिकाधिक भाषा-लाभ हो और हिन्दी भाषा में प्रवीणता को बढ़ाने के लिए उनके भविष्य के द्वार खुलें। अमरीकी सरकार की भी यह हमसे अपेक्षा है । युवा हिन्दी संस्थान के कार्यकर्ता उसी दिशा में पिछले कई महीनों से इसी योजना को कार्यान्वित करने के लिए प्रयत्नशील हैं।
शिविर का कार्यक्रम प्रातः नौ बजे योगाभ्यास से शुरू होगा और उसके बाद हिन्दी शिक्षण की कक्षाएं, कंप्यूटर लैब, हस्तकला, अनेकानेक खेल (क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबलटैनिस, शतरंज, खो-खो, पिट्ठू आदि), नाटक, संगीत, नेचर वॉक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बॉलीवुड के गरमागरम गानों के साथ नाच का दैनिक कार्यक्रम है। दोपहर के खाने के समय भी हिन्दी के कुछ चलचित्र दिखाए जाएंगे जिसमें सब-टाइटल रहेंगे। शिविर की सब गतिविधियों में सब निर्दैश और सभी बातचीत हिन्दी के माध्यम से ही संपन्न होगी। शिविर में अंग्रेज़ी का प्रयोग वर्जित है। भाषा और संस्कृति में अवगाहन और भाषा सीखने का और उसे आत्मसात् करने का यही सहज तरीका है।
अमेरिका में हिन्दी की शिक्षा के लिए यह स्वर्णिम समय है। अमरीका सरकार ने हिन्दी को एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में स्वीकार किया है और फलस्वरूप सभी सरकारी स्कूलों में विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी को पढ़ाने के द्वार खोल दिए गए हैं। अमेरिकी सरकार का यह मानना है कि भविष्य में आर्थिक और राजनैतिक शक्ति के रूप में उभरते हुए भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय और राजनयिक संबंधों के संदर्भ में हिन्दी का महत्व बहुत अधिक है और यह दिन-ब-दिन बढ़ने वाला है। इसी सार्वभौमिक राजनैतिक विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए अमरीका की अगली पीढ़ी को दुनिया की महत्वपूर्ण भाषाओं और उनकी संस्कृतियों के ज्ञान से लैस करना बहुत आवश्यक समझा जा रहा है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस दीर्घकालीन योजना की व्यवस्था हुई है । भाषाओं की इस महत्वपूर्ण योजना को व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी लैंगवेज इनिश्येटिव के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।
भाषा हमारे चिंतन की वाहिका है और हर भाषा का हर मानव के कुछ विशिष्ट मूल्यों के साथ विशेष संयोग होता है। जहां एक ओर प्रवासी युवा पीढ़ी के सदस्य अमरीका को एक समर्थ देश बनाने में अपना योगदान देंगे वहां भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में वे अपने विभिन्न व्यवसायों के लिए भी अपने कैरियर का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हिन्दी भाषा ज्ञान के साथ हमारी युवा पीढ़ी के संबंध भारत के साथ भी संपुष्ट होंगे । उदीयमान भारत से लेकर अमरीका तक सभी के भविष्य के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा है। अमरीकी समाज में द्विभाषी लोगों की मांग बराबर बढ़ रही है और भविष्य में यह और ज़्यादा बढ़ने वाली है। चाहे वे डॉक्टर हों, वकालत के पेशे में हों, अन्तर्राष्ट्रीय व्यवसाय में हों, सरकारी महकमों में हों – सब जगह दूसरी भाषा पर उस भाषा से संबंधित समाजों के मूल्यों और अन्तर्निहित विचारधाराओं को समझने वाले और उन पर अधिकारपूर्वक बात करने वालों को वरीयता प्राप्त है। अमरीका के वर्तमान वयस्क कर्मचारियों को विदेशी भाषाओं की शिक्षा देने के लिए सरकार के कई अपने स्कूल भी हैं जिनमें विर्जीनिया में स्थित फ़ॉरन सर्विस इंस्टीट्यूट और मांट्रे कैलिफ़ोनिया में स्थित डिफ़ैंस लैंग्वेज इंस्टीट्यूट प्रमुख हैं।
Monday, June 14, 2010
अटलाँटा कार्यक्रम की तैयारियां ज़ोर शोर से शुरू
अगले शनिवार को प्रातः नौ बजे युवा हिन्दी शिविर का उदघाटन होगा। इस अवसर पर १०० विद्यार्थियों के अतिरिक्त उनके माता-पिता, नगर के अनेक निमंत्रित अतिथि व लगभग तीस अध्यापक और प्रशासकीय कामों को संभालने वाले कार्यकर्ता वहां उपस्थित होंगे। दीप-प्रज्वालन के साथ दिन की गतिविधियों का शुभारंभ होगा। दैनिक दिनचर्या योगाभ्यास से शुरू होगी और औपचारिक भाषा शिक्षण, कंप्यूटर लैब, क्रिकेट बैडमिंटन शतरंज आदि खेलों में केवल हिन्दी के प्रयोग के साथ साथ सांय ५-३० बजे तेज़ संगीत के साथ छात्रों का नाच होते होते छः बज जाएंगे और उस समय छात्रों के माता-पिता उन्हें लेने आ पहुंचेंगे।
Sunday, June 13, 2010
युवा ग्रीष्मकालीन हिन्दी शिविर
१९ जून से २८ जून तक अटलांटा में १० से १५ वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक भाषा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में १०० युवा भाग लेंगे। प्रतिदिन कार्यक्रम प्रातः ९ बजे योगाभ्यास से शुरू होगा ओर दिनभर अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों के संदर्भ में भाषा का शिक्षण होगा। भाषावैज्ञानिक शोध से समर्थित नियमों द्वारा समायोजित इस कार्यक्रम को अमेरिका के अनेक विश्वविद्यालयों और शोध-संस्थानों का समर्थन और सहयोग प्राप्त है। यह शिविर एक दीर्घकालीन योजना का उपक्रम है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें -
msrtiwari@gmail.com
dalia560@yahoo.com
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